
देहरादून। कौन बनेगा करोड़पति (KBC) के नाम पर चल रहे कथित ऑनलाइन गेम में इनाम जीतने का लालच रुद्रप्रयाग के एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने 8.5 लाख रुपये के इनाम और कार देने का झांसा देकर उनसे करीब 1.50 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। ठगी का शिकार हुए व्यक्ति ने रकम जुटाने के लिए परिचितों से उधार तक लिया।
मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर डिजिटल लेन-देन और संबंधित बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है।
फेसबुक से शुरू हुआ संपर्क
पुलिस को दी शिकायत में अगस्त्यमुनि क्षेत्र के ग्राम किणझाणी निवासी कमल सिंह (54) ने बताया कि वह जनवरी 2026 से फेसबुक पर चल रहे एक ऑनलाइन गेम से जुड़े थे। गेम में सवालों के जवाब देने पर लाखों रुपये का इनाम मिलने का दावा किया जा रहा था।
शिकायत के मुताबिक, गेम में हिस्सा लेने के बाद कमल सिंह को बताया गया कि उन्होंने 8.5 लाख रुपये का पुरस्कार जीता है। इसके बाद व्हाट्सऐप के जरिए उनसे संपर्क किया गया और इनामी राशि जारी करने के नाम पर पहले मामूली टैक्स जमा कराने को कहा गया।
टैक्स और शुल्क के नाम पर बढ़ती गई रकम
शुरुआत में 1,550 रुपये जमा कराने के बाद ठगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क करना शुरू किया। इसके बाद कभी टैक्स, कभी प्रोसेसिंग फीस और कभी अन्य शुल्क के नाम पर लगातार पैसे मांगे गए।
पीड़ित का आरोप है कि ठगों ने भरोसा कायम करने के लिए बड़े कारोबारी और सार्वजनिक हस्तियों की तस्वीरों वाले कथित दस्तावेज भी भेजे। आरबीआई के नाम से भी कथित दस्तावेज भेजकर उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि इनाम का भुगतान वास्तविक है।
इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनके नाम कई करोड़ रुपये और एक कार भी निकली है। इनाम हासिल करने के लिए अलग-अलग मदों में भुगतान करने का दबाव बनाया गया।
छह महीने से ज्यादा समय तक करता रहा भुगतान
शिकायत के अनुसार, कमल सिंह ने 30 मार्च से 16 सितंबर 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई। भुगतान ऑनलाइन लेन-देन के साथ-साथ नकद जमा के माध्यम से भी किया गया। रकम कई बैंकिंग चैनलों के जरिए भेजी गई।
लगातार भुगतान करने के बावजूद जब उन्हें इनाम की राशि नहीं मिली तो उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। शिकायत में कुल नुकसान करीब 1.50 करोड़ रुपये बताया गया है।
उधार लेकर भी जुटाई रकम
पीड़ित के अनुसार, ठगों की मांग पूरी करने के लिए उन्होंने परिचितों और अन्य लोगों से उधार लेकर भी पैसे जुटाए। लंबे समय तक भुगतान करने के बाद भी जब कथित इनाम नहीं मिला तो उन्होंने साइबर पुलिस से संपर्क किया।
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सऐप संपर्कों की जानकारी खंगाल रही है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी प्रतियोगिता या लॉटरी की इनामी राशि जारी करने के नाम पर पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क जमा कराने की मांग साइबर ठगी का संकेत हो सकती है। ऐसे मामलों में भुगतान करने के बजाय संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या सरकारी साइबर हेल्पलाइन के जरिए सत्यापन करना जरूरी है।






