
लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन ने देहरादून में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जैसी बुनियादी ज़रूरत की रक्षा करना सरकार का दायित्व है, लेकिन मौजूदा हालात में शिक्षा व्यवस्था अब “शिक्षा से ज़्यादा वसूली का माध्यम” बन गई है। रंजीत रंजन ने उत्तराखंड के युवाओं की पीड़ा को सामने रखते हुए कहा कि यहाँ का अधिकांश युवा या तो सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करता है, या फिर मेहनत से पढ़कर सरकारी नौकरी हासिल करता है और प्रदेश की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि बार-बार हो रहे पेपर लीक के कारण इन्हीं युवाओं के सपने और बरसों की मेहनत मिट्टी में मिल जाती है। उन्होंने उत्तराखंड की मशहूर कहावत “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम आती है” का ज़िक्र करते हुए कहा कि जिस रफ़्तार से राज्य में परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, उस लिहाज़ से यह कहावत अब सही नहीं ठहरती, क्योंकि पहाड़ की जवानी को ही सबसे ज़्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। रंजीत रंजन ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में देश भर में करीब 89 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जो शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस के ही शीर्ष नेतृत्व ने हाल में सोशल मीडिया पर यह दावा दोहराते हुए कहा था कि इन 10 वर्षों में 89 पेपर लीक के अलावा 48 परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ी हैं, और अब परीक्षा प्रणाली “नीलामी” जैसी बन गई है। गुजरात में पिछले ग्यारह वर्षों में ग्यारह पेपर लीक के मामले खुद राज्य सरकार ने स्वीकार किए हैं। उनका कहना था कि जब प्रधानमंत्री के ख़ुद के राज्य में ही इतने मामले हों, तो यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि पूरे देश में परीक्षा प्रणाली कितनी असुरक्षित हो चुकी है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कड़े कानूनों के बावजूद आख़िर सरकार पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम क्यों साबित हो रही है।






