बेकाबू ट्रैफिक पर लगेगा लगाम, सेना संभालेगी देहरादून के चौराहों की कमान

देहरादून में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सेना के जवानों को मुख्य चौराहों और व्यस्त सड़कों पर यातायात वार्डन के रूप में लगाया जाएगा। यह प्रस्ताव जिलाधिकारी के निर्देश पर तैयार किया गया है, जिससे ट्रैफिक नियमों का पालन बढ़ेगा।

देहरादून की सड़कें इन दिनों ट्रैफिक जाम और अनियंत्रित वाहन चालकों की वजह से काफी परेशानी का सबब बनी हुई हैं। बढ़ते वाहनों की संख्या और नियमों की लगातार अनदेखी से स्थिति दिन-प्रतिदिन जटिल होती जा रही है। इस समस्या के समाधान के लिए अब एक नया कदम उठाया जा रहा है, जिसमें सेना के जवान यातायात प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

जिला सड़क सुरक्षा समिति के तहत लोक निर्माण विभाग ने इस दिशा में पहल की है। समिति के सचिव और प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने यातायात पुलिस अधीक्षक तथा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) को औपचारिक पत्र लिखा है। यह प्रस्ताव जिलाधिकारी सोनिका के निर्देशों और कमान अधिकारी कर्नल पी थपलियाल की सिफारिश पर आधारित है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि राजपुर रोड, घंटाघर, बल्लूपुर चौराहा जैसे व्यस्त क्षेत्रों में पीक ऑवर्स के दौरान ट्रैफिक पूरी तरह बेकाबू हो जाता है। वाहनों की बढ़ती तादाद के साथ-साथ नियमों के उल्लंघन और यातायात कर्मियों की कमी भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में सेना के अनुशासित जवानों को वार्डन की भूमिका सौंपकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्लान बनाया गया है।

यह विचार दिल्ली से प्रेरित है, जहां सेना की इसी तरह की तैनाती से ड्राइवरों में नियम पालन की भावना बढ़ी और जाम की समस्या काफी हद तक कम हुई। देहरादून में भी जवानों की मौजूदगी से वाहन चालक अधिक सतर्क रहेंगे। जवान नियम उल्लंघन की घटनाओं को नोट करेंगे, स्थान, समय और कारण दर्ज करेंगे तथा चालान के लिए यातायात पुलिस को सूचना देंगे।

इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए यातायात पुलिस और आरटीओ से विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई है। निकट भविष्य में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के खुलने और पांवटा साहिब हाईवे के चौड़ीकरण से शहर पर वाहनों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिसमें 20-25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका है। हिमाचल और चंडीगढ़ की ओर से भी ज्यादा वाहन आएंगे। इसलिए यातायात सुधार के सभी जरूरी इंतजाम समय रहते करने पर जोर दिया जा रहा है।

यह पहल अगर सफल होती है तो देहरादून जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए एक मिसाल बन सकती है, जहां अनुशासन और समन्वय से ट्रैफिक की पुरानी समस्याओं पर काबू पाया जा सकेगा।




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