प्रधानाचार्य भर्ती प्रक्रिया के विरोध में हड़ताल, समर्थक शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों ने संभाला मोर्चा**

 

(2 सितंबर 2024) – उत्तराखंड में राजकीय इंटर कॉलेज और हाईस्कूलों में शिक्षण कार्य आज पूरी तरह से जारी रहा, जबकि राजकीय शिक्षक संघ द्वारा चॉक डाउन हड़ताल का आह्वान किया गया था। इस हड़ताल का उद्देश्य लोक सेवा आयोग द्वारा आगामी 29 सितंबर को आयोजित की जाने वाली प्रधानाचार्य की भर्ती परीक्षा का विरोध करना था।

राज्य के विभिन्न इंटर कॉलेजों में आज शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों ने शिक्षण कार्य को सुचारू रूप से संचालित किया। यह देखा गया कि प्रधानाचार्य विभागीय भर्ती प्रक्रिया का समर्थन करने वाले शिक्षकों ने हड़ताल को नकारते हुए विद्यार्थियों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी।

 

गौरतलब है कि राज्य के 80% इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पद रिक्त हैं। सरकार ने इन पदों को भरने के लिए विभागीय भर्ती प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है, जो कि न्यायालय में विचाराधीन है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत, लोक सेवा आयोग ने मार्च में 692 पदों के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित की थी।

 

राजकीय शिक्षक संघ ने इस भर्ती प्रक्रिया का विरोध करते हुए हड़ताल शुरू की, लेकिन इसके बावजूद कई इंटर कॉलेजों में शिक्षण कार्य जारी रहा। राजकीय इंटर कॉलेज ज्ञानसू, पलेठी नौघर, पित्रधार, उत्तरकाशी, रामनगर, नैनीताल देवपुरा, चकराता, नत्थुवावाला छरबा देहरादून, देवप्रयाग, टिहरी पतलोट, कांसखेत, बगवाड़ी कमलपुर, नाहसैंण, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज श्रीनगर, पौड़ी रामनगर, बनाखेड़ा, जिब्या कोटधार, चंपावत, पुरोला, कमसाल, बड़कोट, मरोड़ा, परकंडी, मणिगुह, रानी पोखरी, नैटवाड, गडडूगाड़, सिकरौड़ा, चोरगलिया, सौडा, बंगसील, दिनेशपुर सहित अन्य सैकड़ों विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से सुचारू रही।

 

राजकीय इंटर कॉलेज पोन्टी, सरनोल, कलोगी, राना, बड़कोट, बरनीगाड़, गडोली में भी शिक्षण कार्य सामान्य रूप से चला। प्रधानाचार्य विभागीय भर्ती समर्थक शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया। यह स्थिति दिखाती है कि राज्य के शिक्षकों में विभागीय भर्ती प्रक्रिया को लेकर मतभेद स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आ रहे हैं।

 

सरकार द्वारा किए गए नियमावली में संशोधन और विभागीय भर्ती प्रक्रिया का समर्थन करने वाले शिक्षक यह मानते हैं कि यह राज्य के शैक्षिक विकास के लिए आवश्यक कदम है। वहीं, संघ इस प्रक्रिया को अस्वीकार करते हुए अपने हितों के लिए लामबंद हो गया है।

 

आने वाले समय में इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन आज के दिन शिक्षकों द्वारा अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए शिक्षण कार्य जारी रखने का प्रयास सराहनीय रहा।

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